
वैसे, दुनिया को बने कितने साल हो गए हैं? बिग बैंग और कॉस्मिक रेडिएशन को प्रमाण मानें तो हमारा कॉसमॉस लगभग 13 .7 अरब साल पहले अस्तित्व में आया. सूर्य और सौरमंडल की उत्पत्ति लगभग ५०० करोड़ साल पहले हुई और एक अनुमान के मुताबिक सूर्य को अभी नष्ट होने में भी इतना ही समय लगेगा, हांलाकि उससे बहुत पहले ही पृथ्वी पर जीवन का सम्पूर्ण विनाश हो चुका होगा (सूर्य में होने वाले या अन्य अन्तरिक्षीय या भौगोलिक कारणों से).
कहीं पढ़ा था कि पृथ्वी की आयु को यदि 24 घंटा मान लें तो मनुष्य को आये हुए अभी एक सैकंड भी नहीं हुआ है. बस एक सैकंड!? और तीन साल बाद सब ख़त्म होने जा रहा है? हे राम!
और माया सभ्यता वालों ने इसको सैकड़ों सालों पहले पता भी लगा लिया और लिख भी गए. ये बात और है कि वे स्वयं को ही नहीं बचा पाए और स्पेनी हमलावरों ने उनकी अच्छे से वाट लगा दी.
भारत में इतने बड़े-बड़े विद्वान्, त्रिकालदर्शी और ज्योतिषी हुए लेकिन किसी को भी इसका कोई अंदेशा नहीं हुआ! ऐसा कैसे हो सकता है? हमारा सारा विप्रवर्ग क्या अब तक घास छीलता रहा है? लानत है ऐसी सभ्यता और संस्कृति पर!
ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब सन 2000 की शुरुआत में भी कुछ मूढ़मगजों ने टेम्पल टटल धूमकेतु की आमद को विनाश से जोड़कर देखा और अमेरिका में 110 लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर ली. हमें तो उसी समय लगने लगा था कि ये घटनाएँ किसी बड़ी आपदा का संकेत हैं.
चार साल में कुल जमा आठ-दस बार 2012 में दुनिया ख़त्म होने की बात सुनकर तो मेरी हालत वाकई पतली होने लगी है. पत्रकारिता जगत के इतने बड़े विद्वान् जब पूरे हवाले से इस खबर को फ्लैश करते हैं तो इसपर शक करने की कोई गुंजाईश ही नहीं. वैसे हाइड्रोन कोलाइडर को लेकर भी कुछ महीनों पहले ऐसी ही खबर चली थी. उसे इंडिया टीवी पर बार-बार देखकर मध्य प्रदेश में एक किशोरी इतनी भयभीत हो गई की उसने आत्महत्या कर ली.
मैं तो मानता हूँ भाई. बार-बार तो हमारे इतने जागरूक और सजग पत्रकार भाई झूठ नहीं बोलेंगे. कुछ तो है इस खबर में. मुझे तो विश्वास है की दुनिया ख़त्म हो जायेगी.
तो मैंने तब तक बच रहा समय आनंद से व्यतीत करने के लिए एक योजना बनानी शुरू कर दी है. नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद मैं GPF के पैसों से कार खरीदने वाला हूँ. बच्चों को अब स्कूल में भर्ती नहीं कराऊँगा. जीवन बीमा पॉलिसियों को कैंसल करवाना है. पिताजी को पटाकर जमीन बिकवानी है ताकि 2012 तक हम शहर-शहर मजे से घुमते हुए अपना समय काट लें.
दुनिया के ख़त्म होने के नज़ारे को कैमरे में कैद करना बेवकूफ़ी होगी इसलिए हम तो ऐसा कुछ नहीं करेंगे. किसी ने कुछ दिनों पहले किसी ब्लौग पर लिखा की करोड़ों लोग यदि एक साथ गायत्री मंत्र का पाठ करें तो इस प्रकार की मुसीबतें टल जाएँगी. लेकिन मुझे इसमें शक है.
पोस्ट तो लंबी होती जा रही है. खैर, अब आप मुझे बताएं की दुनिया वाकई में 2012 में ख़त्म होनेवाली हो तो आपकी ज़िन्दगी में क्या-क्या बदल जायेगा. आप क्या करना चाहेंगे और बचा हुआ वक़्त कैसे बिताना चाहेंगे?
कहीं पढ़ा था कि पृथ्वी की आयु को यदि 24 घंटा मान लें तो मनुष्य को आये हुए अभी एक सैकंड भी नहीं हुआ है. बस एक सैकंड!? और तीन साल बाद सब ख़त्म होने जा रहा है? हे राम!
और माया सभ्यता वालों ने इसको सैकड़ों सालों पहले पता भी लगा लिया और लिख भी गए. ये बात और है कि वे स्वयं को ही नहीं बचा पाए और स्पेनी हमलावरों ने उनकी अच्छे से वाट लगा दी.
भारत में इतने बड़े-बड़े विद्वान्, त्रिकालदर्शी और ज्योतिषी हुए लेकिन किसी को भी इसका कोई अंदेशा नहीं हुआ! ऐसा कैसे हो सकता है? हमारा सारा विप्रवर्ग क्या अब तक घास छीलता रहा है? लानत है ऐसी सभ्यता और संस्कृति पर!
ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब सन 2000 की शुरुआत में भी कुछ मूढ़मगजों ने टेम्पल टटल धूमकेतु की आमद को विनाश से जोड़कर देखा और अमेरिका में 110 लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर ली. हमें तो उसी समय लगने लगा था कि ये घटनाएँ किसी बड़ी आपदा का संकेत हैं.
चार साल में कुल जमा आठ-दस बार 2012 में दुनिया ख़त्म होने की बात सुनकर तो मेरी हालत वाकई पतली होने लगी है. पत्रकारिता जगत के इतने बड़े विद्वान् जब पूरे हवाले से इस खबर को फ्लैश करते हैं तो इसपर शक करने की कोई गुंजाईश ही नहीं. वैसे हाइड्रोन कोलाइडर को लेकर भी कुछ महीनों पहले ऐसी ही खबर चली थी. उसे इंडिया टीवी पर बार-बार देखकर मध्य प्रदेश में एक किशोरी इतनी भयभीत हो गई की उसने आत्महत्या कर ली.
मैं तो मानता हूँ भाई. बार-बार तो हमारे इतने जागरूक और सजग पत्रकार भाई झूठ नहीं बोलेंगे. कुछ तो है इस खबर में. मुझे तो विश्वास है की दुनिया ख़त्म हो जायेगी.
तो मैंने तब तक बच रहा समय आनंद से व्यतीत करने के लिए एक योजना बनानी शुरू कर दी है. नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद मैं GPF के पैसों से कार खरीदने वाला हूँ. बच्चों को अब स्कूल में भर्ती नहीं कराऊँगा. जीवन बीमा पॉलिसियों को कैंसल करवाना है. पिताजी को पटाकर जमीन बिकवानी है ताकि 2012 तक हम शहर-शहर मजे से घुमते हुए अपना समय काट लें.
दुनिया के ख़त्म होने के नज़ारे को कैमरे में कैद करना बेवकूफ़ी होगी इसलिए हम तो ऐसा कुछ नहीं करेंगे. किसी ने कुछ दिनों पहले किसी ब्लौग पर लिखा की करोड़ों लोग यदि एक साथ गायत्री मंत्र का पाठ करें तो इस प्रकार की मुसीबतें टल जाएँगी. लेकिन मुझे इसमें शक है.
पोस्ट तो लंबी होती जा रही है. खैर, अब आप मुझे बताएं की दुनिया वाकई में 2012 में ख़त्म होनेवाली हो तो आपकी ज़िन्दगी में क्या-क्या बदल जायेगा. आप क्या करना चाहेंगे और बचा हुआ वक़्त कैसे बिताना चाहेंगे?










5 comments:
आज ही पढ़ा था..उस हिसाब से लाइफ स्टाईल चेंज करना शुरु की है. :)
० दो साल के लिए क्या मार्केटिंग में समय गंवाना..यूँ ही लूट लो...जब तक सजा का समय आयेगा..दुनिया की नमस्ते के साथ निपट चुके होंगे.
अगर बात सच है तो आपका सोचना भी सच है, और आपकी योजना भी ।
बस जीये जाइये । आलेख का आभार ।
तब तो हमें भी कुछ सोचना पड़ेगा । :)
२०१२ में दुनिया ख़तम होने वाली है ऐसा सोच कर बिंदास जीने का मजा ही कुछ और है !!!!!
पर मुझे नहीं लगता की ऐसा कुछ होगा .... याद है नोस्त्रेदेमुस की भविष्यवाणी १९९९ के आस-पास दुनिया ख़तम हो जायेगी ... क्या हुआ हम तो २००९ मैं हैं | अभी पूर्ण प्रलय आने मैं लाखों वर्ष बाकी है .... हाँ इस बिच छोटे-मोटे विध्वंस आते - जाते रहेंगे |
वैसे इस सोच का लुत्फ़ उठाना चाहिए जम कर ... :)
aise to duniya hi nahi chalegi.sab apne apne kaam chor kar jindagi ke maje le to.main to normal hi rehne wala hoon.kyonki marna to ek din sab ko hai to jab ishwar ki iksha..........
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